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हरे-भरे 'आनंदवन' जंगल में एक बहुत ही चंचल और नटखट बंदर रहता था, जिसका नाम था उछलू बंदर। उसका काम सुबह से शाम तक बस एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगाना और पूरे जंगल में ऊधम मचाना था। वह कभी किसी की पूंछ खींचता, तो कभी किसी के फल चुरा कर भाग जाता।
लेकिन इस शरारती स्वभाव के पीछे एक बहुत ही कोमल और कलात्मक दिल छिपा था। उछलू को प्रकृति की सुंदरता बहुत लुभाती थी। वह घंटों कल-कल बहती नदी के किनारे शांत बैठा रहता। उसे नीले आसमान, ऊंचे पर्वतों और रंग-बिरंगे पक्षियों को निहारना बहुत पसंद था। अक्सर वह सोचता कि काश उसके पास कागज़ और रंग होते, तो वह इस पूरी सुंदरता को अपनी चित्रकला (Painting) के ज़रिए कागज़ पर उतार देता। यह एक अद्भुत monkey painting story की शुरुआत थी।
रंगों का जुगाड़ और व्यापार की योजना
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एक दिन उछलू से रहा नहीं गया। वह जंगल के पास बसे इंसानों के एक गाँव में गया। वहाँ एक स्टेशनरी की दुकान थी। उछलू ने इशारों-इशारों में दुकानदार से कुछ कागज़ और वॉटरकलर (रंग) मांगे। दुकानदार बहुत ही दयालु था। उसने उछलू की कला के प्रति लगन देखी और उसे रंग-ब्रश दे दिए। उछलू ने अपने तरीके से दुकानदार को भरोसा दिलाया कि वह इन रंगों से चित्र बनाकर पैसे कमाएगा और उसकी उधारी चुका देगा।
जंगल वापस आकर उछलू ने सबसे पहले नदी, पहाड़ों और तैरती हुई बतखों का एक बहुत ही सुंदर प्राकृतिक चित्र बनाया। यह देखकर जंगल के सभी जानवर हैरान रह गए। उसकी कला की चर्चा पूरे जंगल में आग की तरह फैल गई।
गिल्लू गिलहरी और शेर खान के चित्र
कुछ ही दिनों में उछलू एक मशहूर चित्रकार बन गया। एक दिन 'गिल्लू' नाम की एक प्यारी सी गिलहरी उसके पास आई और मटकते हुए बोली, "उछलू भैया, मेरी पूंछ कितनी सुंदर है! क्या तुम मेरा भी एक चित्र बना दोगे?"
उछलू ने थोड़ा अकड़ते हुए कहा, "चित्र तो मैं बना दूँगा, लेकिन इसके लिए तुम्हें मुझे दस रुपये देने होंगे।" गिल्लू हैरान रह गई, "पैसे? हम जानवर पैसे कहाँ से लाएंगे?" उछलू ने चालाकी से कहा, "पास के गाँव में जाओ और किसी भी इंसान के घर से ले आओ।"
गिल्लू ने अपना चित्र बनवाने की खुशी में ऐसा ही किया और एक घर से दस का नोट लाकर उछलू को दे दिया। अब तो यह पूरी animal kids story एक व्यापार में बदल गई थी।
कुछ दिन बाद, जंगल का राजा 'शेर सिंह' दहाड़ता हुआ आया। "उछलू! मैं जंगल का राजा हूँ। मेरा चित्र सबसे शानदार होना चाहिए।" उछलू ने अपनी फीस बढ़ा दी। उसने कहा, "महाराज, आप राजा हैं। आपके रुतबे (Status Symbol) के हिसाब से आपकी फीस सौ रुपये होगी।" शेर सिंह को अपनी तारीफ सुनकर बहुत मज़ा आया। उसने कहा, "सौ क्या, मैं तुम्हें दो सौ रुपये दूँगा!" शेर ने भी इंसानों की बस्ती से एक कुर्ते की जेब से पैसे निकालकर उछलू को दे दिए।
धन का लालच (Greed) और खोती हुई आज़ादी
अब उछलू के पास बहुत सारा पैसा जमा हो गया था। उसने वह सारा धन एक पुराने पेड़ की खोह (Hollow) में छिपा दिया। लेकिन जैसे ही उसके पास धन आया, उसकी खुशी और आज़ादी छिन गई। अब वह पेड़ों पर उछलता-कूदता नहीं था। वह दिन भर बस उस पेड़ की खोह के पास बैठा रहता ताकि कोई उसके पैसे न चुरा ले।
पैसों के इस greed (लालच) ने उसे एक बंधुआ मजदूर बना दिया था। उसे न नींद आती थी और न ही फल खाने का मन करता था। उसने सोचा, "क्यों न मैं किसी सुंदर बंदरिया से शादी कर लूँ? वह मेरे धन की रखवाली करेगी और मैं आराम से राजाओं की तरह रहूँगा।"
चुलबुली की फटकार और असली ज्ञान (True Happiness)
उछलू ने सबसे पहले 'बिंदिया' नाम की बंदरिया के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और अपने पैसों का घमंड दिखाया। लेकिन बिंदिया ने तुरंत मना कर दिया। फिर वह 'बुनिया' के पास गया, उसने भी उसे झिड़क दिया।
अंत में, वह जंगल की सबसे समझदार बंदरिया 'चुलबुली' के पास पहुँचा। उछलू ने सीना तानकर कहा, "चुलबुली, देखो मैंने पेड़ की खोह में कितना सारा पैसा जमा किया है। मुझसे शादी कर लो, मैं तुम्हें खूब सारे गहने ला कर दूँगा।"
चुलबुली जोर-जोर से हँसने लगी। उसने कहा, "उछलू, तुम पागल हो गए हो! क्या तुम इंसान बन गए हो? इंसान ही जीवन भर पैसे जोड़ते हैं और एक दिन मर जाते हैं। हम बंदर तो आज़ाद परिंदे हैं। भगवान ने हमें यह पूरा हरा-भरा जंगल दिया है। हमारे लिए मीठे फल ही हमारा खजाना हैं और नीला आसमान हमारी छत।"
चुलबुली ने आगे कहा, "तुमने बंदरों का धर्म छोड़कर इंसानों का लालच अपना लिया है। इन पैसों ने तुम्हारी हँसी और उछल-कूद छीन ली है। अगर तुम्हें असली खुशी (true happiness) चाहिए और मुझसे शादी करनी है, तो इन पैसों को बाहर फेंक दो।"
लालच का अंत और खुशियों की वापसी
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चुलबुली की बातें सुनकर उछलू की आँखें खुल गईं। उसे एहसास हुआ कि जब से उसके पास पैसा आया है, वह मुस्कुराना ही भूल गया है। यह moral story for kids हमें यही सिखाती है कि धन कभी शांति नहीं दे सकता।
उछलू तुरंत उस पेड़ की खोह के पास गया। उसने मुट्ठी भर-भर के सारे नोट बाहर निकाल लिए और हवा में उड़ा दिए। बिंदिया, बुनिया और चुलबुली ने मिलकर उन पैसों को जंगल से दूर सड़क पर फेंक दिया।
जैसे ही पैसे गए, उछलू को लगा मानो उसके सिर से कोई बहुत बड़ा पहाड़ उतर गया हो। वह खुशी से झूम उठा और फिर से पुरानी तरह पेड़ों पर कलाबाज़ियाँ खाने लगा। चुलबुली भी उछलू के इस बदलाव से बहुत खुश हुई और उसने शादी के लिए हाँ कर दी।
आजकल उछलू बंदर चित्र तो बनाता है, लेकिन पैसों के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की खुशी के लिए—बिल्कुल मुफ़्त!
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
लालच बुरी बला है: धन का लालच इंसान (या जानवर) की रातों की नींद और आज़ादी छीन लेता है।
असली खुशी प्रकृति में है: पैसा सब कुछ नहीं होता। प्रकृति ने हमें मुफ्त में जो खुशियां दी हैं, उनका कोई मोल नहीं है।
कला का उद्देश्य: कला (Art) का असली उद्देश्य खुशी बांटना होना चाहिए, न कि केवल पैसे कमाना।
